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Sunday, September 27, 2020

उम्रकैद


कॉलेज कैंटीन के सामने वाले लान में बैठी मैं चाय के सिप ले रही थी कि सुरजीत कौर आती दिखाई दी।

 "अरे आओ आओ। मिठाई का डिब्बा कहाँ है?" मैने उसका स्वागत करते हुए कैंटीन वाले को चाय लाने को कहा।

सुरजीत आके धम्म से बैठ गई। चेहरे पर खिन्नता और उदासी झलक रही थी। वह आज ही सप्ताह के बाद लौटी  है। छुट्टी लेकर गांव गई थी अपनी भतीजी की शादी पर। विवाह के दस साल के बाद भी अपनी कोई  संतान नही। भतीजी उसे बेटी से बढ़ कर प्रिय थी। दो साल पहले उसी के पास रह कर उसने इसी कॉलेज से बीकॉम की थी। फिर उसे आगे पढ़ने के लिए शहर भी उसी ने भेजा । बड़े भाई गांव में खेती करते हैं। सुरजीत के बाद वह पहली लड़की है जो इतना पढ़ लिख गई है।

  "काहे की मिठाई ," सुरजीत ने सिर झुका लिया।

"अरे क्या हुआ? क्या शादी टूट गई?"मैंने घबरा कर पूछा। सुरजीत कुलीग होने के साथ अंतरंग मित्र भी है। जाने से पहले भी काफी अनमनी सी थी पर मैं कुछ पूछ नहीं पाई थी।

"क्या कहूं! सिमरन यहां आने से पहले से ही गांव में स्कूल के एक लड़के के संपर्क में आ गई थी। यहां तीन साल में भी व्हाट्सएप, फेसबुक आदि पर उससे जुड़ी रही। वह उससे मिलने हमारी जानकारी के बिना यहां भी आता रहा। जब वह CA करने  शहर गई तो वहां भी पहुंच जाता था। खुद तो बाहरवी के बाद पढ़ा नहीं। बाप की जमीनों पर ऐश करता है। बुरी आदते हैं। सिमरन ने जब उससे पीछा छुड़ाना चाहा तो  सारे वीडियो, तस्वीरें लेकर  भाई साहिब के पास पहुंच गया...।

"लड़की और परिवार की इज्जत के लिए उसी निकम्मे आवारा से शादी करके आएं है। सिमरन रोती पछताती विदा हो गई। यह शादी थोड़ी थी ..यह उम्रकैद है उम्रकैद।" सुरजीत के आंसू बह रहे थे।


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