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Saturday, September 5, 2020

वैश्या

 


तेज़ बारिश के साथ साथ बिजली कड़क रही थी। अंधेरी सड़क पर टैक्सी चल रही थी। पिछली सीट पर वह पड़ोस के माताजी के साथ डरी सी बैठी थी। सुबह वे दोनो घर से शहर के लिए निकली थीं। शहर में जहां उसकी ससुराल थी। ससुर फिर बीमार हो गए थे। पति को कोई जरूरी काम आन पड़ा था उन्होंने पैसे देकर भेजा था कि ससुर को अस्पताल में भर्ती करवा कर और सास और छोटे देवर को हौंसला देकर लौट आना। यूं तो रात रुक कर आने को कहा था पर घर में दो साल का बेटा और पांच साल की बेटी के कारण उसने रात को लौटना ही ठीक समझा। पड़ोस के माता जी तो साथ थीं ही जिन्हें वह साथ के लिए विनती कर अपने साथ ले आई थी।  मगर रास्ते में टायर पंचर हो जाने के कारण वे और लेट हो गए थे। उस पर तेज वर्षा के कारण टैक्सी धीरे धीरे चल रही थी।  रास्ते में कहीं रुक कर कोई पीसीओ ढूंढ कर पति को बताने का अवसर भी नहीं मिल पाया था।                                 

 रात के बारह बज रहे थे । रवि बेड पर औंधा लेटा वीसीआर पर ब्ल्यू फिल्म देख रहा था। बीच बीच में ग्लास से व्हिस्की सिप कर लेता। क्वार्टर खाली होने को था। दूसरे कमरे में पालने में छोटा बेटा गहरी नींद में था। उसने  खांसी की दवा का आधा चम्मच उसे और एक चम्मच बेटी को पिला दिया था। दोनों बेसुध सो रहे थे। नीचे कालीन पर  चौदह पन्द्रह बरस की काम वाली लड़की भी बेपरवाह सो रही। थी। उसे आज उसने बच्चे को संभालने का बहाना कर के लिए रोक लिया था। रवि के मुंह पर अजीब सी मुकराहट थी।


      इतने में बाहर घंटी बजी। इतनी रात को कौन...। उसने जल्दी से वीसीआर बन्द किया। बोतल को बेड के नीचे खिसकाया। दरवाजा खोला तो बीवी सकपकाई सी खडी़ थी। 


"इतनी लेट.. इस टाइम पर तुम सड़कों पर घूम रहीं थीं। क्या ज़रूरत थी रात को ही वापस चलने की। सुबह आ जाती। रास्ते में अगर पुलिस या कोई रोकता तो क्या सोचता कि कोई वैश्या अपनी पिंप बाई के साथ कहीं जा रही है...", रवि का क्रोध और बौखलाहट चरम सीमा पर थे।  






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