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Wednesday, September 9, 2020

दुआ


उनके जाने के बाद...


जो सांसे उनकी सोहबत में चलती थीं
तन्हाई के शोर में गुमसुम सी हैं

जो बातें उनकी गुफ्तगू में सुनते थे
खामोशी में एहसास का गुंजन भर हैं

उनकी नजदीकियां जो कभी आसपास थीं
अब ख्वाबों की ताबीर में ढूंढते हैं

उनकी जुदाई ने इबादत सिखा दी
वरना हम तो संग की खुशी में काफ़िर बने बैठे थे

जिस खुदा ने मेरी किस्मत से बेदखल कर दिया उनको
हर जनम में वो साथ हों उससे यह इज़हार करते हैं

अगले जहां में मिलने की दुआ है अब
ज़िन्दगी को उसके कबूल होने का इंतजार कहते है।





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