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Friday, March 12, 2021

Thought for Today: क्या हृदय की पुकार ईश्वर तक पहुंचती है

 

क्या हृदय की पुकार ईश्वर तक  पहुंचती है

प्रश्न यह नही है, प्रश्न है क्या हम ईश्वर को दिल से पुकारते हैं। यदि हां तो अवश्य ईश्वर तक हमारी पुकार पहुंचती है।
प्रभु हमारी आस्था हमारी निष्ठा के भूखे हैं। वे हमारे अटूट विश्वास के प्रतीक हैं। वे तो अंतर्यामी हैं। हमारी आत्मा में निहित हैं। उन्हें पुकारने के लिए कहीं जाना नहीं पड़ता।
मेरी स्वर्गीय मां ने एक बार एक स्वामीजी से पूछा,"मैं जब भी ईश्वर की पूजा में बैठती हूं मेरे अश्रु निकलते हैं। ऐसा क्यों?" स्वामीजी ने कहा था,"तुम्हारे पांच बच्चे हैं। जब तुम काम मे व्यस्त होती हो, यदि बड़ा बच्चा पुकारता है तो तुम कहती हो आती हूं और अपना काम करती रहती हो। पर यदि छोटा शिशु ज़ोर से रोता है तो काम छोड़ कर भागती हो। ऐसा क्यों"?
जब हम एक अबोध बालक की भांति सच्चे मन से प्रभु को पुकारते हैं तो वे भी सब कुछ छोड़ कर हमारी पुकार सुनते हैं। वे तो भाव के भूखे हैं।

कहा कहौं छवि आप की, भले बने हो नाथ !
तुलसी मस्तक तब नवै, जब धनुष बान लो हाथ !!

तुलसी दास जी की पुकार सुन कर कृष्ण भगवान ने भी बांसुरी छोड़ धनुष बाण उठा लिया था।

डा. नीलिमा डोगरा

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