क्या जीवन लक्ष्य बिना व्यर्थ है
कहीं पढ़ा था कि लक्ष्य हीन जीवन बिना पते के लिफाफे की तरह होता है जो इधर उधर पड़ा रहता है। सचमुच लक्ष्य होना जीवन को दिशा प्रदान करता है, सार्थक बनाता है। बचपन से ही हम सपने देखने लगते हैं कि बड़े होकर क्या बनेंगे। आजकल तो बच्चे के स्कूल में भर्ती होते ही उसके माता पिता भी उसके भविष्य के सपने संजोना शुरू कर देते हैं। वास्तव मे लक्ष्यहीन जीवन अधूरा है।
लक्ष्य से हमारा अभिप्राय केवल जीवन का ध्येय अथवा लक्ष्य नहीं हैं अपितु लक्ष्य छोटे छोटे भी हो सकते हैं। जैसे स्वस्थ जीवन शैली अपनाना, दूसरों के प्रति सहिष्णुता, दयालुता तथा मैत्रीभाव विकसित करना, अच्छे श्रोता बन दूसरों की बात सुनना आदि। कुछ भी करने या बनने का ध्येय निश्चित ज़रूर करना चाहिए। आवश्यक यह है कि जो भी लक्ष्य हम निर्धारित करें उसे पूरा अवश्य करें। अर्जुन की आंख की तरह हमारा पूरा फोकस उसी लक्ष्य पर होना चहिए। लक्ष्य निश्चित करना तथा उस के लिए कार्यशील रहना हमें उत्साह, स्फूर्ति व प्रेरणा से भरपूर रखता है। हमारे जीवन को उद्देश्य तथा मार्गदर्शन प्रदान करता है।
इसमें कोई संदेह नहीं कि जिनके जीवन में कोई लक्ष्य नहीं उनका जीवन व्यर्थ ही है।
किसी ने सही कहा है..
जिस दिन से चला हूं मेरी मंज़िल पे नज़र है
इन आंखों ने कभी मील का पत्थर नहीं देखा
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