विरासत देश और लोगों की पहचान को परिलाक्षित करती है।
भारत एक ऐसा देश है जहाँ की विरासत अत्यंत विस्तृत, समृद्ध तथा विविध है। हमारी यह बहुमूल्य विरासत केवल स्मारकों , कला वस्तुओं के संग्रहण तथा ऐतिहासिक स्थानों तक ही सीमित है बल्कि इसमें हमारी परंपराएं , हमारी सोच व जीवनशैली भी शामिल है जो सदियों से चलती आई है। हमारे पूर्वजों से प्राप्त
इस समृद्ध तथा अद्वितीय विरासत को बचाये रखना हमारा कर्तव्य भी है और अधिकार भी। हमारी परंपराएं, कला प्रदर्शन, धार्मिक एवं सांस्कृतिक उत्सव और परंपरागत शिल्पकारी हमारे
गौरवशाली अतीत के प्रतीक हैं। हमारे पूर्वजों ने सदियों से हमारी विरासत को संरक्षित किया है, हमें अपनी जड़ों से जोड़ कर रखा है। हमारा भी कर्तव्य है युवा पीढ़ी में अपनी विरासत के लिए प्रेम का आह्वान करें। शुरू से ही युवा पीढ़ी को हमारे गौरवशाली अतीत से परिचित कराएं। इससे उनके अंदर गर्व की भावना लाने में मदद मिलेगी और वे परंपरा को जारी रखने के लिए प्रेरित होंगे । इसके लिए शिक्षकों के साथ-साथ अभिभावकों के सामूहिक प्रयास की जरूरत है।
आज के विश्वीकरण एवं औद्योगिकीकरण के युग में हम बेशक पश्चिमी मूल्यों व जीवन शैली की ओर उन्मुख हो रहे हैं । टेक्नोलॉजी से हो रहे तीव्र परिवर्तनों के कारण आधुनिकीकरण की प्रक्रिया तेज़ हो रही है। ऐसे में अपनी विरासत को सुरक्षित रख पाना वाकई किसी चुनौती से कम नहीं है। इन सब की महत्ता से भी इंकार नहीं किया जा सकता। आवश्यकता है दोनों में सामंजस्य बिठाने की। हमें चाहिए कि हम किसी देश से पीछे भी न रहें । साथ में अपनी समृद्ध विरासत से गौरवान्वित हो उसे अगली पीढ़ी को भी पारित करें।
यही हर भारतीय के जीवन का उद्वेश्य होना चाहिए।
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