बेटियां तो सब की सांझी होती है फिर बहु और बेटी में अंतर क्योँ? इतना पढ़ लिख कर भी, २१वि सदी में भी क्या अभी भी इनकी तकदीर नहीं बदलेगी? क्या अभी भी सीता की अग्नि -परीक्षा जारी रहेगी? अभी भी उसे दुत्कारा , तिरकृसित किया जाता रहेगा? सदा उसे शक की परिधि में बांध कर Judge किया जाता रहेगा? ज़रा सा भी react करने पर उस पर झूठी तोहमते लगा कर मानसिक पीढ़ा दी जाती रहेगी? समाज के ठेकेदार उसे क्या यूह़ी प्रतारित करते रहेंगे?
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