हॉल से लगातार अमित व अदिति की चुहलबाज़ी की आवाज़ें आ रहीं थीं। साथ ही उसकी सास के ठहाके। अमित आज ऑफिस से जल्दी घर आ गए थे। मीनल रसोई में उन सब के लिए चाय बना रही थी। उसकी सास भीतर आकर साथ पकोड़े और सैंडविच का भी हुक्म दे गईं थी।
उसकी सास ही घर की कर्ता धर्ता थीं। प्रखर व्यक्तित्व, दबंग। पूरे परिवार पर उनका ही सिक्का चलता था। सोसायटी की किट्टी पार्टियों की रौनक थीं। ससुर शहर के नामी गिरामी वकीलों में गिने जाते थे। अमित भी पिता की लॉ फर्म मेें ही उनके सहायक के तौर पर कार्यरत था।
सात साल पहले वह मीनल को अपने मायके के कस्बे से ब्याह कर लाई थी। इक्कीस बरस की छुई मुई सी मीनल आठ वर्ष बड़े अमित के सामने बच्ची सी लगती थी। पिता बचपन मेें चल बसे थे। चार भाई बहनों में सब से बड़ी थी। ईश्वर ने वह कमी अतीव सौन्दर्य देकर पूरी कर दी थी। किसी शादी के लिए मायके आई उसकी सास को उसके सादे लावण्य ने मोह लिया था।
परन्तु अब वह किसी को एक आंख नहीं भा रही थी। सात साल से उसकी गोद जो सूनी थी। नौबत धागे टोटकों मंत्र तंत्र तक आ गई थी। घर मेें पंडितों, स्वामियों व पूजा पाठ का सिलसिला चल निकला था। उसकी सास उसे लेकर कई बार हस्पतालों के चक्कर लगा चुकी थी। आखिर अमित उनका इकलौता बेटा था।
सास ससुर के तेवर बदले हुए थे। अमित तो शुरू से ही "मामाज़ ब्वॉय" था। उसका खाना पीना, कपड़े सब उसकी सास ही तय करतीं।
एक महीने से उसकी सास की सहेली की बेटी अदिति उनके यहां रह रही थी। किसी नौकरी के सिलसिले मेें शहर आई थी और उसकी सास ने फ्लैट मिलने तक घर पर ही रोक लिया था। अमित भी उससे काफी घुल मिल गया था। उसकी सास इससे काफी प्रसन्न दिखती थीं।
मीनल का दिल सुबह से धड़क रहा था। उसके बार बार कहने पर कल अमित उसके साथ अपना टेस्ट करवा कर आया था। बहुत कठिनता से उसकी सास इसके लिए राज़ी हुई थी। मीनल के सारे टेस्ट ठीक होने के कारण डाक्टर का कहना मानना ही पड़ा था।
इतने में फोन की घंटी बजी। हमेशा की तरह उसकी सास ने फोन उठाया। जब मीनल चाय और नाश्ता लेकर हॉल मेें आई तो वे वहां नहीं थीं। रात को डिनर टेबल पर भी नहीं आईं। मीनल ने उनके बेडरूम का दरवाजा खटखटा कर खाने को पूछा तो मना कर उसे लौटा दिया।
अगले दिन नहा धो, पूजा कर मीनल हॉल में आई तो देखा अदिति अटैची लिए तैयार खड़ी थी।
"वह कई दिनों से अपनी दोस्त के साथ शिफ्ट होना चाह रही थी। मैं ही रोक रही थी," उसके जाने के बाद सास ने सफाई सी दी।
मीनल किचन की ओर जाने लगी तो उसका हाथ पकड़ कर अपने पास बिठा लिया और बोलीं,"बेटी मैं सोच रही थी क्यों ना तुम और अमित बच्चा गोद ले लो। मेरी बहुत जान पहचान हैै मै बात करुंगी । छोटा और दूधमुआ बच्चा घर में आ जाएगा तो घर मेें रौनक हो जाएगी।"
मीनल उनके बदले हाव भाव देख रही थी।
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