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Monday, January 30, 2023

सनम तेरे बिना

 दालान भर अंधेरे हैं सनम तेरे बिना

हर रात कटती जीवन की सवेरे बिना


दोस्तों की महफिल मैं खोए खोए से हैं

शब्द भी सन्नाटो ने घेरे हैं  सनम तेरे बिना


अंधेरे रास आ गए हैं हमें इस कदर

उदासी की चादर में छिपे बैठे है उजारे तेरे बिना


मायूस सा कर गया हार जीत का खेल

अब तो हार भी मान जाते हैं  सनम हारे बिना


सांस लेने का हुनर  ज़िंदगी ने सिखा दिया

यूं तो गुजरता हर पल सनम  गुजारे बिना


ना मंजिल की खबर ना  राह है कोई

 बस भटकते फिरते हैं खुद को संवारे बिना


कोशिश तो बहुत  है  स्मित के दिए जला लें

खुशियों के फूल खिल ना सके पर सनम तेरे बिना


दालान भर अंधेरे हैं सनम तेरे बिना

हर रात कटती जीवन की सवेरे बिना




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