दालान भर अंधेरे हैं सनम तेरे बिना
हर रात कटती जीवन की सवेरे बिना
दोस्तों की महफिल मैं खोए खोए से हैं
शब्द भी सन्नाटो ने घेरे हैं सनम तेरे बिना
अंधेरे रास आ गए हैं हमें इस कदर
उदासी की चादर में छिपे बैठे है उजारे तेरे बिना
मायूस सा कर गया हार जीत का खेल
अब तो हार भी मान जाते हैं सनम हारे बिना
सांस लेने का हुनर ज़िंदगी ने सिखा दिया
यूं तो गुजरता हर पल सनम गुजारे बिना
ना मंजिल की खबर ना राह है कोई
बस भटकते फिरते हैं खुद को संवारे बिना
कोशिश तो बहुत है स्मित के दिए जला लें
खुशियों के फूल खिल ना सके पर सनम तेरे बिना
दालान भर अंधेरे हैं सनम तेरे बिना
हर रात कटती जीवन की सवेरे बिना
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